- पनोरमा ग्रुप पर आयकर विभाग का महाछापा, संजीव मिश्रा के ठिकानों पर 14 जगहों पर रेड जारी
- “सत्य की राह पर अडिग, डरने वाले नहीं” — आयकर महाछापे के बीच संजीव मिश्रा का दमदार बयान
- कानून का सम्मान, हर जांच में पूरा सहयोग; दुर्भावना हुई तो करेंगे सामना
- पनोरमा ग्रुप में I-T का रेड या 2026 का सियासी बिसात? सीमांचल में छिड़ी बयानों की जंग
रिपोर्ट: रुद्र किंकर, पूर्णिया/अररिया/सुपौल I सीमांचल की फिजां मंगलवार सुबह अचानक उस वक्त बदल गई, जब रियल एस्टेट जगत के बड़े नाम पनोरमा ग्रुप पर आयकर विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी और हाई-इम्पैक्ट कार्रवाई करते हुए एक साथ 14 ठिकानों पर महाछापा मार दिया। यह ऑपरेशन इतना गोपनीय और सुनियोजित था कि खबर फैलते ही पूर्णिया से सुपौल तक कारोबारियों, निवेशकों और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया।
आयकर विभाग की कई विशेष टीमों ने समन्वित रणनीति के तहत ग्रुप के कॉर्पोरेट दफ्तरों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों और प्रमुख सहयोगियों के आवासों को एक साथ घेर लिया। जिला स्कूल रोड स्थित मुख्य कॉर्पोरेट कार्यालय को जांच का केंद्र बनाया गया है, जहां अधिकारी वित्तीय दस्तावेज, सर्वर, हार्ड डिस्क और डिजिटल ट्रांजैक्शन की परत-दर-परत पड़ताल कर रहे हैं।
ग्रुप के चर्चित आवासीय प्रोजेक्ट ‘ई-होम्स’ भी जांच के दायरे में है। छातापुर के रामपुर स्थित पनोरमा हॉस्पिटल और पनोरमा पब्लिक स्कूल में निवेश के स्रोत, फंड फ्लो और खर्च के पैटर्न को खंगाला जा रहा है। सुपौल के करजाइन स्थित बसंत राइस मिल समेत कुल 14 लोकेशनों पर चल रही यह एकसाथ कार्रवाई क्षेत्र की सबसे बड़ी टैक्स रेड मानी जा रही है।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कई परिसरों को अस्थायी पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। अंदर मौजूद कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और बिना अनुमति बाहर जाने पर रोक की चर्चा है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि विभाग इस जांच को किसी भी सूरत में हल्का नहीं लेना चाहता।
अधिकारियों ने सीएमडी और उनके परिजनों से सीधे सवाल-जवाब भी किए हैं। हालांकि देर शाम तक किसी नकद बरामदगी या बड़े खुलासे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन दस्तावेजों की भारी मात्रा संकेत दे रही है कि जांच लंबी और गहरी चल सकती है।
बताया जा रहा है कि आयकर विभाग को पिछले कुछ समय से जमीन की खरीद-बिक्री और बड़े निवेशों में संभावित अनियमितताओं के संकेत मिल रहे थे। महीनों की निगरानी और खुफिया इनपुट के बाद इस मेगा ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
संजीव मिश्रा केवल कारोबारी दुनिया का बड़ा चेहरा ही नहीं, बल्कि कोसी-सीमांचल की राजनीति में भी प्रभावशाली माने जाते हैं। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में उनकी सक्रियता और तेजी से बढ़ता व्यावसायिक प्रभाव इस छापेमारी को और भी हाई-प्रोफाइल बना रहा है। यही वजह है कि अब यह सवाल तेजी से उभर रहा है—क्या यह सिर्फ आर्थिक जांच है या 2026 के चुनाव से पहले की सियासी हलचल?
*संजीव मिश्रा का आधिकारिक बयान*
छापेमारी के बीच पनोरमा ग्रुप के सीएमडी संजीव मिश्रा ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा—
“हम कानून का सम्मान करते हैं और हर जांच में पूरा सहयोग करेंगे। सत्य और पारदर्शिता हमारी पहचान है। लेकिन यदि किसी भी प्रकार की दुर्भावना से हमें रोकने या दबाने की कोशिश की जाएगी, तो हम ऐसे प्रयासों से डरने वाले नहीं हैं। समाज की सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में हमारा कार्य निरंतर जारी रहेगा। आप सभी का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है — सत्य की राह पर हम दृढ़ हैं और रहेंगे।”
मिश्रा के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं। समर्थक इसे नियमित जांच बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे बड़े खुलासों की शुरुआत मान रहे हैं।
फिलहाल आयकर विभाग की टीमें लगातार कार्रवाई में जुटी हैं और पूरे सीमांचल की नजर इस मेगा जांच पर टिकी है। आने वाले दिनों में जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कई अहम परतें खोल सकता है।
एक बात तय है—पनोरमा ग्रुप पर पड़ा यह महाछापा केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सीमांचल की सियासत और कारोबार—दोनों का तापमान अचानक बढ़ा देने वाली घटना बन चुका है।
हालांकि, अब तक किसी भी नकदी या बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

