- ₹50,711 करोड़ का हाइवे ब्लूप्रिंट: मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने खोला ‘स्पीड बिहार’ का विजन, कोसी बनेगा कनेक्टिविटी हब
- एक्सप्रेसवे, मेगा ब्रिज और फोरलेन नेटवर्क से बदलेगा ट्रांसपोर्ट सिस्टम
- कोसी-सीमांचल को पहली बार इतनी बड़ी हिस्सेदारी
पटना /डॉ.रूद्र किंकर वर्मा, मार्गदर्शक न्यूज I बिहार अब “धीमी सड़कों” की पहचान से बाहर निकलकर हाईटेक रोड नेटवर्क की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पथ निर्माण विभाग के बजट अभिभाषण में मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने ₹50,711 करोड़ की विशाल परियोजनाओं का खाका पेश करते हुए साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था की असली रफ्तार सड़कों से तय होगी।
सरकार का लक्ष्य सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि इकोनॉमिक कॉरिडोर तैयार करना है—ताकि उद्योग, कृषि, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स एक साथ गति पकड़ें। इस मेगा प्लान में कोसी और सीमांचल क्षेत्र को रणनीतिक रूप से जोड़ा गया है, जिससे वर्षों से भौगोलिक चुनौतियों से जूझ रहे इलाके विकास की मुख्यधारा में आएंगे।
*“5 घंटे में राजधानी” विजन पर काम*
मंत्री ने बताया कि राज्य के सुदूर इलाकों से 5 घंटे के भीतर पटना पहुंचने के लक्ष्य को आधार बनाकर सड़क परियोजनाएं डिजाइन की जा रही हैं। धार्मिक, ऐतिहासिक, शैक्षणिक और औद्योगिक केंद्रों को हाई-स्पीड मार्गों से जोड़ने की तैयारी है।
पिछले वर्ष स्वीकृत ₹23,974 करोड़ की 137 परियोजनाओं में से अधिकांश पर काम शुरू हो चुका है, जबकि ₹14,757 करोड़ की 129 नई योजनाएं विभिन्न चरणों में हैं।
*कोसी क्षेत्र: अलगाव से कनेक्टिविटी की ओर*
इस बजट की सबसे बड़ी खासियत कोसी बेल्ट पर फोकस है।
मधुबनी जिले में भेजा-बकौर के बीच कोसी नदी पर मेगा ब्रिज निर्माणाधीन
सुपौल–अररिया सहित कई राज्य उच्च पथों का चौड़ीकरण
ग्रामीण सड़कों को चरणबद्ध तरीके से दो लेन में बदलने की योजना
बाढ़ प्रभावित इलाकों में ऑल-वेदर रोड नेटवर्क
इन परियोजनाओं से न सिर्फ आवागमन सुधरेगा, बल्कि कृषि उत्पादों की तेज ढुलाई, व्यापार विस्तार और आपदा प्रबंधन भी मजबूत होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर सड़कें कोसी क्षेत्र की “भौगोलिक बाधा” को आर्थिक अवसर में बदल सकती हैं।
*एक्सप्रेसवे का जाल: बिहार बनेगा ट्रांजिट पावर*
केंद्र के सहयोग से कई हाई-स्पीड कॉरिडोर पर काम जारी है:
वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेसवे
गोरखपुर–सिलीगुड़ी कॉरिडोर
पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे
बक्सर–भागलपुर मार्ग
इनके पूरा होने पर बिहार पूर्वी भारत का लॉजिस्टिक गेटवे बन सकता है।
*जेपी गंगा पथ का मेगा विस्तार*
पहले से चालू जेपी गंगा पथ को अब पश्चिम में दीघा-कोइलवर और पूर्व में मुंगेर से भागलपुर तक बढ़ाने की योजना है। लगभग ₹16,465 करोड़ की इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर लागू किया जा रहा है, जिससे निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
*जाम से मुक्ति का रोडमैप*
रेल क्रॉसिंग पर जाम खत्म करने के लिए:
44 रेलवे ओवरब्रिज तैयार
56 पर निर्माण जारी
प्रमुख मार्गों पर अंडरपास की योजना
इसके अलावा, शहरों में बायपास और फ्लाईओवर बनाकर ट्रैफिक लोड कम करने की रणनीति है।
*स्टेट हाईवे से गांव तक अपग्रेड*
करीब 3617 किमी राज्य उच्च पथों को न्यूनतम दो लेन में बदलने का लक्ष्य
एशियन डेवलपमेंट बैंक की मदद से हजारों करोड़ की परियोजनाएं
लगभग 3000 किमी नए स्टेट हाईवे घोषित करने की तैयारी
ग्रामीण सड़कों को भी चौड़ा कर “लास्ट-माइल कनेक्टिविटी” मजबूत करने पर जोर
*अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट*
मंत्री डॉ. जायसवाल के अनुसार मजबूत सड़क नेटवर्क से:
कृषि उत्पाद तेजी से बाजार पहुंचेंगे
निवेश और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा
पर्यटन सर्किट विकसित होंगे
बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होगा
उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार में सड़कों का डबल विकास” दिख रहा है और आने वाले वर्षों में बिहार की पहचान बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर वाले राज्य के रूप में बनेगी।
*बड़ी तस्वीर*
यह बजट सिर्फ निर्माण योजनाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि “स्पीड, स्केल और स्मार्ट कनेक्टिविटी” पर आधारित विजन है। अगर परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो कोसी से लेकर मगध तक—बिहार की विकास रफ्तार नई ऊंचाई छू सकती है I

