मार्गदर्शक न्यूज, पटना : पटना, 06 फरवरी 2026 : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेष के लिए “समेकित कृषि प्रणाली” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण-सह-प्रक्षेत्र भ्रमण कार्यक्रम का समापन 06 फरवरी 2026 को हुआ। यह कार्यक्रम 02 से 06 फरवरी 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें सिक्किम राज्य से आए कुल 27 कृषकों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य कृषकों के ज्ञान एवं कौशल को सुदृढ़ करते हुए टिकाऊ, संसाधन-संरक्षण आधारित एवं विविधीकृत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना था। समापन सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि उत्पादन हानि को कम करने के लिए आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल देते हुए सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से स्मार्ट खेती को भविष्य की आवश्यकता बताया।
डॉ. अनुप दास ने यह भी कहा कि किसानों की आय में वृद्धि के लिए कृषि-उद्यमिता, मूल्य संवर्धन एवं बाजार से जुड़ाव की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
इससे पूर्व, पाठ्यक्रम निदेशक एवं फसल अनुसंधान प्रभाग के प्रमुख डॉ. संजीव कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का समग्र प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा प्रतिभागियों को प्राप्त प्रमुख अधिगम निष्कर्षों एवं प्रक्षेत्र-आधारित अनुभवों की जानकारी दी। उन्होंने कृषकों से प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशिक्षण की व्यावहारिक उपयोगिता एवं प्रासंगिकता पर संतोष व्यक्त किया। भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने कविता के माध्यम से समेकित कृषि प्रणाली के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे अपने-अपने खेतों में अपनाने की अपील की।
समापन सत्र के अंतर्गत प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्रों के साथ कृषि इनपुट्स, जिनमें सब्जी एवं धान के बीज, प्रूनिंग कैंची एवं फावड़े शामिल हैं, वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन सह-पाठ्यक्रम निदेशक-सह-वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कुमार ने किया। अंत में पाठ्यक्रम समन्वयक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

