- सीतामढ़ी में फाइलेरिया मुक्ति के लिए मेगा अभियान: 3,174 केंद्रों पर 11 फरवरी को लगेगा विशेष शिविर
- 10 फरवरी से शुरू होगा एमडीए अभियान, 43 लाख से अधिक आबादी को दवा खिलाने का लक्ष्य
- स्कूलों में अंतिम तीन दिन लगेंगे बूथ, प्रधानाध्यापकों और पंचायती राज अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
मार्गदर्शक न्यूज, सीतामढ़ी। जिला स्वास्थ्य समिति और स्वास्थ्य विभाग ने जिले को हाथीपांव (फाइलेरिया) जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त करने के लिए कमर कस ली है। आगामी 10 फरवरी से शुरू होने वाले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान की सफलता को लेकर रविवार को वीबीडीएस कार्यालय में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) और जिला स्वास्थ्य समिति के साझा सहयोग से एक मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान डीभीबीडीसीओ डॉ. रविन्द्र कुमार यादव ने बताया कि अभियान के तहत जिले की करीब 43,30,028 की विशाल आबादी को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
14 दिनों का घर-घर अभियान और स्कूलों में विशेष बूथ : अभियान की रणनीति को साझा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि आगामी 11 फरवरी को जिले के सभी 3,174 आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा कैंप का आयोजन किया जाएगा। इन केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मियों की सीधी देखरेख में आम जन को दवा का सेवन कराया जाएगा। इसके साथ ही अगले 14 दिनों तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर दस्तक देंगी ताकि कोई भी व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रहे। अभियान के अंतिम तीन दिनों में जिले के 1,784 स्कूलों में विशेष बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहाँ छात्र-छात्राओं को उनकी निगरानी में दवा खिलाई जाएगी।
प्रशिक्षण और निगरानी के लिए पुख्ता इंतजाम: इस व्यापक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने जमीनी स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिला स्तर पर स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को पहले ही विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा चुका है, ताकि सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। दवा खिलाने के लिए कुल 1,672 दल बनाए गए हैं, जिसमें 3,344 दवा प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। पूरे कार्य की मॉनिटरिंग के लिए 166 पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है।
स्वस्थ दिखने वाले व्यक्तियों के लिए भी दवा अनिवार्य: कार्यशाला में डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया के लक्षण संक्रमण के कई वर्षों बाद उभरते हैं, इसलिए स्वस्थ दिखने वाले व्यक्तियों को भी यह दवा लेना अनिवार्य है। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में छिपे संक्रमण को शुरुआती दौर में ही नष्ट करना है। हालांकि, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को इस दवा का सेवन नहीं करना है। इस मौके पर पिरामल के डीएम प्रभाकर कुमार, पी एल रोहित कुमार, सीएफएआर प्रतिनिधि सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मी उपस्थित थे।

