- नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ रहा भारत, अमित शाह का नेतृत्व निर्णायक : हाजी डॉ. शकील सैफी
- स्पष्ट नीति, सख्त रणनीति और विकास आधारित दृष्टिकोण से बदली तस्वीर:चेयरमैन वर्ल्ड पीस हार्मोनी
रिपोर्ट रुद्र किंकर, मार्गदर्शक न्यूज, नई दिल्ली Iवर्ल्ड पीस हार्मोनी के चेयरमैन हाजी डॉ. शकील सैफी ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत नक्सलवाद के अंत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि मजबूत नीति, दृढ़ इच्छाशक्ति और ‘जीरो टॉलरेंस’ रणनीति का परिणाम है।
सैफी ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बना रहा, जिसने विकास, शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित किया। लेकिन गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने समस्या को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रखकर इसके सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर भी काम किया।
उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों को कभी “रेड कॉरिडोर” कहा जाता था, वहां अब सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। सरकारी योजनाओं के जमीन पर उतरने से आम नागरिकों का भरोसा बढ़ा है और उग्रवाद की जमीन कमजोर पड़ी है।
सैफी के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में नक्सली हिंसा की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। सुरक्षाबलों और नागरिकों की हानि घटी है, कई कुख्यात नक्सली मारे गए हैं और बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है। उन्होंने इसे सख्ती और पुनर्वास—दोनों को साथ लेकर चलने वाली नीति की सफलता बताया।
उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है। यह संदेश प्रशासनिक तंत्र और जनता दोनों को प्रेरित करता है कि सरकार अपने संकल्प को लेकर गंभीर है।
वर्ल्ड पीस हार्मोनी, जो शांति और राष्ट्रीय एकता के लिए कार्यरत संगठन है, का मानना है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब राष्ट्र सुरक्षित हो और हर नागरिक को विकास का समान अवसर मिले। सैफी ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ यह लड़ाई किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंसा और अलगाव की सोच के विरुद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद का अंत उन लाखों आदिवासी और ग्रामीण नागरिकों के लिए नई शुरुआत होगा, जो वर्षों तक असुरक्षा के माहौल में जीते रहे। शिक्षा, रोजगार और सम्मान के अवसर बढ़ने से भारत एक शांत और सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरेगा।
*हाईटेक नजरिया*
सरकार की रणनीति में अब टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी, बेहतर इंटेलिजेंस नेटवर्क और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन अधिक प्रभावी और लक्षित हुए हैं।
*धांसू*
“नक्सल-मुक्त भारत” का समयबद्ध लक्ष्य सुरक्षा नीति में आक्रामक बदलाव का संकेत देता है—जहां सख्ती और विकास साथ-साथ चल रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा अभियान, बुनियादी ढांचे का विस्तार और पुनर्वास योजनाएं अगर इसी गति से आगे बढ़ती रहीं, तो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित हो सकती है। इससे न केवल आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि देश के दूरदराज इलाकों में आर्थिक और सामाजिक प्रगति को भी नई रफ्तार मिलेगी।

