बिपुल कुमार कर्ण, (प्रधान संपादक, मार्गदर्शक न्यूज), अररिया (बिहार)। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) पटना द्वारा अररिया जिले में बैंक कर्मियों, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) तथा आम जनता के लिए नक़ली नोटों की पहचान, उनकी रोकथाम एवं सुरक्षित विदेशी मुद्रा विनिमय से संबंधित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में आरबीआई पटना के महाप्रबंधक अमित कुमार, सशस्त्र सीमा बल के जवानों, विभिन्न बैंकों के अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को नक़ली नोटों के प्रति जागरूक कर उनके प्रसार पर रोक लगाना तथा विदेशी मुद्रा का लेनदेन केवल अधिकृत माध्यमों से करने के लिए प्रेरित करना था। सीमावर्ती जिला होने के कारण अररिया में इस तरह के कार्यक्रम की विशेष महत्ता बताई गई।
कार्यक्रम को तीन सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में बैंक कर्मियों को भारतीय नोटों की सुरक्षा विशेषताओं, नक़ली नोटों की पहचान के व्यावहारिक तरीकों, नकली नोटों के प्रबंधन, रिपोर्टिंग प्रणाली तथा कटे-फटे नोटों के विनिमय की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। इस सत्र को बैंकिंग प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम बताया गया।
दूसरे सत्र में आम जनता के लिए टाउनहॉल बैठक आयोजित की गई, जिसमें लोगों को नक़ली नोटों से बचाव के उपाय एवं भारतीय मुद्रा की सुरक्षा विशेषताओं के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि विदेशी मुद्रा का विनिमय केवल अधिकृत संस्थानों के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। नागरिकों को आरबीआई की वेबसाइट “पैसा बोलता है” के माध्यम से भी जानकारी लेने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में लोगों के प्रश्नों का समाधान किया गया।
तीसरे सत्र में सशस्त्र सीमा बल के जवानों को नक़ली नोटों की पहचान, संबंधित दिशा-निर्देशों तथा विधिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर साक्षी गुप्ता (प्रबंधक, आरबीआई पटना), प्रशांत गुप्ता, गोपाल कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक इंदु शेखर, मुख्य प्रबंधक अमित कुमार झा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों में नक़ली नोटों की पहचान और रोकथाम संबंधी समझ को मजबूत करने के साथ-साथ वित्तीय जागरूकता बढ़ाने तथा सुरक्षित और पारदर्शी वित्तीय प्रणाली के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।

